Ram ke Geet – राम के गीत

मनुजता में थे सर्व समर्पण, राम तुम्हीं अनुरागी थे।
तुम जिनके मन में बसते थे, वो कितने बड़भागी थे।

सूरज की आभा के जैसे मुख पर प्रभा तुम्हारे हैं।
सुबह-सुबह सुरमई आवाज में पंछी तुम्हें पुकारे हैं।
राम तुम्हीं से जीवन सबका, तुमको सब हीं प्यारे हैं।
जीत गए तुमको पाकर वो जो दुनिया से हारे हैं।

वार दिया परहित में जीवन, ऐसे तुम महात्यागी थे।
तुम जिनके हिस्से आए थे वो कितने बडभागी थे।

तुमको पाकर धन्य अवध है, धन्य ये सारी धरती है।
दशो दिशाएं झुक झुक कर तुमको प्रणाम ये करती है।
सरयू की लहरें प्रतिपल बस राम की माला जपती है।
राम तुम्हारी कृपादृष्टि इस जग की पीड़ा हरती है।

जिनके कण कण में बसे तुम, वो कितने बैरागी थे।
तुम जिनके हिस्से आए थे, वो कितने बडभागी थे।

नग्न पांव हीं चले राम तुम, वन में वचन निभाने को।
कितने थे तुम तपोधर्म, ना सोचा कुछ भी पाने को।
सरल दीप से जले थे निशदिन, तम क्रूरता का मिटाने को।
जन को तारा, मन को मारा, हर्ष धरा पर लाने को।
करुणावतार, सुख के सागर तुम, तुम हीं आह्लादि थे।
तुम जिनके हिस्से आए थे वो कितने बड़भागी थे।
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