New Short Sanskrit Quotes For Instagram bio | Top 15 भगवतगीता के 15 संस्कृत श्लोक हिंदी अर्थ

short sanskrit quotes for instagram bio

अथ केन प्रयुक्तोऽयं पापं चरति पूरुषः ।
अनिच्छन्नपि वाष्र्णेय बलादिव नियोजितः । । ३६

Hindi translation:- अर्जुन भगवान श्री कृष्ण से पूछते हैं कि यह कौन है जो मुझसे पाप करा रहा है। मेरी तो इच्छा भी नहीं है, मुझे ऐसा लगता है कि बलपूर्वक मुझसे यह काम करवाया जा रहा है।

English translation:- Arjuna asks Lord Krishna who is this who is making me sin. I do not even wish, I feel that I am being forced to do this work.

भावार्थ:- यह अर्जुन का तात्पर्य है कि मनुष्य न चाहते हुए भी पाप कर्म के लिए प्रेरित क्यों होता है। ऐसा लगता है कि उसे बलपूर्वक उनमें लगाया जा रहा है। यह ऐसा क्यू होता और कैसे होता है तथा कोन करता है।


काम एष क्रोध एष रजोगुणसमुद्भवः ।
महाशनो महापाप्मा विद्ध्येनमिह वैरिणम् ॥ ३७ ॥

Hindi translation:- भगवान श्री कृष्ण अर्जुन को बताते है कि मनुष्य से पाप करने वाल रजो गुड है। रजोगुड से काम उत्पन्न होता है जो बाद में क्रोध का रूप धारण करता है और जो इस संसार का पापी शत्रु है।

English translation:- Lord Shri Krishna tells Arjuna that, It is lust alone, which is born of contact with the mode of passion, and later transformed into anger. Know this as the sinful, all-devouring enemy in the world.

भावार्थ:- यह भगवान श्री कृष्ण का तात्पर्य है कि रजो गुड के कारण काम, क्रोध उत्पन्न होता है और यही मनुष्य को पाप करने के लिए प्रेरित करता है। यह मनुष्य का सबसे बड़ा पापी शत्रु है।


आवृतं ज्ञानमेतेन ज्ञानिनो नित्यवैरिणा ।
कामरूपेण कौन्तेय दुष्परेणानलेन च ॥ ३९ ॥

Hindi translation:- भगवान श्री कृष्ण अर्जुन को बताते है कि यह मनुष्य के ज्ञान को ढक देता है और ज्ञानी लोगों का सबसे बड़ा शत्रु है। हे अर्जुन मनुष्य के अंदर काम के रूप में एक ऐसी अग्नि बनकर निवास करता है जो कभी बुझती नहीं।

English translation:- Lord Shri Krishna tells Arjuna that, The knowledge of even the most discerning gets covered by this perpetual enemy in the form of insatiable desire, which is never satisfied and burns like fire, O Arjuna

भावार्थ:- यह भगवान श्री कृष्ण का तात्पर्य है कि यहां ज्ञानी व्यक्ति के संपूर्ण ज्ञान को ढक देता है अर्थात नष्ट कर देता है। यह ज्ञानियों का सबसे बड़ा शत्रु है। हे कुन्ती पुत्र यह काम के रूप आता है और एक ऐसी अग्नि के रूप में रहता है जो कभी नष्ट नहीं होती

inspirational sanskrit quotes with meaning


इन्द्रियाणि मनो बुद्धिरस्याधिष्ठानमुच्यते ।
एतैर्विमोहयत्येष ज्ञानमावृत्य देहिनम् ॥ ४० ॥

Hindi translation:- भगवान श्री कृष्ण अर्जुन को बताते है कि यह काम इंद्रिय मन बुद्धि में विद्यमान रह कर ज्ञान को अपने वश में करके ज्ञान उसको नष्ट कर कर देता है।

English translation:- Lord Shri Krishna tells Arjuna that The senses, mind, and intellect are said to be breeding grounds of desire. Through them, it clouds one’s knowledge and deludes the embodied soul.

भावार्थ:- यह भगवान श्री कृष्ण का तात्पर्य है कि यह काम का निवास स्थान इंद्रियों, मन तथा बुद्धि है अर्थात काम हमेशा इंद्रियों, मन तथा बुद्धि में विद्यमान रहता है। इसके द्वारा यह काम जीवात्मा के वास्तविक ज्ञान को मोहित कर ज्ञान को ढक देता है अर्थात नष्ट कर देता है।

तस्मात्त्वमिन्द्रियाण्यादौ नियम्य भरतर्षभ ।
पाप्मानं प्रजहि ह्येनं ज्ञानविज्ञाननाशनम् ॥ ४१ ॥

Hindi translation:- इसलिए हे अर्जुन, तुम काम को वश में करने के लिए इंद्रियों से शुरुआत करो। क्योंकि यह काम तुमसे इतने पाप करवाएगा कि तुम्हारी ज्ञान विज्ञान बुद्धि नष्ट हो जाएगी।

English translation:- Therefore O Arjuna, in the very beginning bring the senses under control and slay this enemy called desire, which is the embodiment of sin and destroys knowledge and realization.

भावार्थ:- इसलिए हे अर्जुन! प्रारंभ में ही इंद्रियों को वश में करके इस पाप के महान काम का दमन करो क्योंकि अगर तुमने ऐसा नहीं करा तो यह तुम्हारी पूरी बुद्धि को नष्ट कर देगा और ज्ञान तथा आत्म साक्षात्कार के इस विनाश करता का वध करो।


श्रुतिविप्रतिपन्ना ते यदा स्थास्यति निश्चला ।
समाधावचला बुद्धिस्तदा योगमवाप्स्यसि ॥ 2 .53 ॥

Hindi translation:- जब तुम्हारा मन वैदिक ज्ञान के कर्म फलों से प्रभावित ना हो और वह आत्मा साक्षात्कार की समाधि में स्थिर हो जाए, तब तुम्हें दिव्य चेतना प्राप्त हो जाएगी।

English translation:- When your intellect ceases to be allured by the fruitive sections of the Vedas and remains steadfast in divine consciousness, you will then attain the state of perfect Yog.

भावार्थ:- जितने लोग होते हैं उतने किस्म की बातें होती है और जितनी बातें होती है उतने तरीके से बुद्धि सोचती है। जब दिमाग (बुद्धि) स्थिर होकर एक जगह या परमात्मा में लग जाती है तो उसे ही योग कहते हैं। बुद्धि का स्तर हो जाना ही एकाग्रता कहलाता है। स्थिर होकर एकाग्रता से कुछ करने को समाधि की स्थिति भी कहते हैं।


नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः ।
न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुतः । । २३ ॥

Hindi translation:- भगवान श्री कृष्ण अर्जुन को बताते है कि आत्मा न तो कभी भी या किसी भी प्रकार के शस्त्र द्वारा खण्ड-खण्ड नहीं किया जा सकता है, आत्मा को न अग्नि द्वारा जलाया जा सकता है, न जल द्वारा भिगोया या जा सकता है, न वायु द्वारा सुखाया जा सकता है।

English translation:- Lord Shri Krishna tells Arjuna that the soul can never be Chopped by any or any kind of weapon, nor can it be burnt. Water cannot wet it nor can air dry it.

भावार्थ:- यह भगवान श्री कृष्ण का तात्पर्य है कि शरीर में रहने वाले देह का कभी भी वध नहीं किया जा सकता। वह अजन्मा ,नित्य, शाश्वत, तथा पुरातन है। इस लिए उसे इसी भी बात की चिंता नहीं करनी चाहिए।


यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत ।
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् ॥ 7
परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम् ।
धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे ॥ 8 ॥