Hindi Meaning Sanskrit Shlokas for Success

sanskrit shlok with hindi meaning

येषां न विद्या न तपो न दानं ज्ञानं न शीलं न गुणो न धर्मः। ते मर्त्यलोके भुविभारभूता मनुष्यरूपेण मृगाश्चरन्ति।।

shlok in sanskrit with meaning in hindi

अर्थ — जिस मनुष्यों में विद्या का निवास है, न मेहनत का भाव, न दान की इच्छा और न ज्ञान का प्रभाव, न गुणों की भिव्यक्ति और न धर्म पर चलने का संकल्प, वे मनुष्य नहीं वे मनुष्य रूप में जानवर ही धरती पर विचरते हैं

Sanskrit Shlokas in Hindi किसी कार्य की सफलता या असफलता हमारे द्वारा किए गए प्रयास के आधार पर तय होती है। प्रयास अच्छा होगा तो सफलता निश्चित है। अन्यथा हमें और प्रयास करने की जरूरत है। संस्कृत में कई ऐसे श्लोक बताए गए हैं जो व्यक्ति को सफलता प्राप्त करने में सहायता कर सकते हैं। आइए जानते हैं कुछ ऐसे ही संस्कृत श्लोक उनके अर्थ के साथ।

नई दिल्ली, अध्यात्म डेस्क। Sanskrit Shlokas for Success: संस्कृत सबसे प्राचीन भाषाओं में से एक है। यह भाषा जितनी प्राचीन है उनती वैज्ञानिक भी। संस्कृत में ऐसे कई श्लोक मौजूद हैं जो व्यक्ति को प्रेरणा देने का काम करते हैं। आइए पढ़ते हैं ऐसे ही कुछ श्लोक जो व्यक्ति को मेहनत करने और सफल होने के लिए प्रेरित करते हैं।

“उद्यमेन हि सिध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः।

अर्थ – सिर्फ इच्छा करने से उसके काम पूरे नहीं होते, बल्कि व्यक्ति के मेहनत करने से ही उसके काम पूरे होते हैं। जैसे सोये हुए शेर के मुंह में हिरण स्वयं नहीं आता, उसके लिए शेर को परिश्रम करना पड़ता है।

“योगस्थः कुरु कर्माणि संगं त्यक्त्वा धनंजय ।

सिद्धयसिद्धयोः समो भूत्वा समत्वं योग उच्यते ॥”

अर्थ – इस श्लोक में भगवान श्री कृष्ण अर्जुन से कहते हैं कि हे धनंजय! तू आसक्ति को त्यागकर, सफलताओं और विफलताओं में समान भाव लेकर सारे कर्मों को कर। ऐसी समता ही योग कहलाती है

“उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत।

क्षुरासन्नधारा निशिता दुरत्यद्दुर्गं पथस्तत्कवयो वदन्ति॥”

अर्थ – उठो, जागो, और अपने लक्ष्य को प्राप्त करो। तेरे रास्ते कठिन हैं, और वे अत्यन्त दुर्गम भी हो सकते हैं, लेकिन विद्वानों का कहना हैं कि कठिन रास्तों पर चलकर ही सफलता प्राप्त होती है।

न चोरहार्य न राजहार्य न भ्रतृभाज्यं न च भारकारि।

व्यये कृते वर्धति एव नित्यं विद्याधनं सर्वधनप्रधानम्।।

अर्थ- एक ऐसा धन जिसे चुराया नहीं जा सकता, जिसे कोई भी छीन नहीं सकता, जिसका भाइयों के बीच बँटवारा नहीं किया जा सकता, जिसे संभलना बिल्कुल भी मुश्किल नहीं है और जो खर्च करने पर और अधिक बढ़ता है, वह धन, विद्या है। विद्या सबसे श्रेष्ठ धन है।